सुबह ७ बजे का अलार्म घनघनाया और मन भन्ना गया ....आज किसी तरह आफिस जल्दी पहुचना था.... इसलिए कोसा बहुत अपने आप को लेकिन उठना था क्योकि जीवन के जद्दोजहद से जूझना था .....फ़िर क्या था ....गिरते पड़ते पंहुचा आफिस के गेट पर मोबाईल में देखा कि नौ बज के पच्चीस मिनट हो गए बस कर दिया हस्ताक्षर .....शुरू हो गई नौकरी .......स्टोरी आईडिया और खबरों का दौर.....इसी बीच कुछ मित्रो को हो गई देर कर दिए लेट और हो गए रजिस्टर में अनुपस्थित .....कट गई तनख्वाह .....मरते क्या न करते वाली हाल ने उन्हें अन्दर से झकझोर दिया ....बेचारे कुछ देर तो बिताये आफिस में ...लेकिन दे गया धैर्य जबाब वो भी कोसे किस्मत को ......और निकल पड़े घर की ओर .....सिलसिला निरंतर जारी रहेगा .......दोस्त अभी तो स्टोरी बाकी है.....ये कहानी किसी भी आफिस की हो सकती है इसलिए सावधान .................ध्यान दीजिये समय की पाबन्दी को ....
2 comments:
सही कहा वो कहते हैं न टाइम इज मनी
समय की पाबंदी तो जरुरी है भाई!!
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