Sunday, April 20, 2008

कया आप डॉ मुखतार अंसारी को जानते हैं?

चौंक गए न...हम उस आदमी की बात नहीं कर रहे जिसके बारे में आप सोंच रहे हैं। जी हां, डॉ मुख्तार अंसारी भी उसी गाजीपुर में पैदा हुए थे जिस इलाके से 'मुख्तार अंसारी' ताल्लुक रखते हैं। डॉ मुख्तार अंसारी आजादी के लड़ाई में अगली कतार के नेता थे। उनका जन्म 25 दिसम्वर 1880 को उत्तरप्रदेश के गाजीपुर जिले में युसुफपुर-मोहमदावाद नामके गांव में हुआ था। अंसारी, जमींदार परिवार से ताल्लुक रखते थे।उन्होने मद्रास मेडिकल कालेज से डिग्री लेने के बाद इंग्लैन्ड से एमएस और एमडी की डिग्री हासिल की। अपनी काबिलियत के बल पर उन्होने इग्लैंड के कई बड़े अस्पतालों में काम किया और वहां के स्वास्थ्य विभाग में ऊंचे अोहदे तक पहुंचे। एक भारतीय का ऊंचे पद पर जा पहुंचना वहां के तत्कालीन नस्लवादी समाज को रास नहीं आया और उनके खिलाफ हाउस अॉफ कामंस में मामला उठाया गया। ऐसा कहा जाता है कि वहां के तत्कालीन हेल्थ सेक्रेटरी ने संसद को बताया कि डॉ अंसारी की नियुक्ति इसलिए की गई कि उस समय उस पद के लिए उनसे काबिल कोई नहीं था। आज भी लंदन के केयरिंग क्रॉस हॉस्पिटल में डॉ अंसारी के सम्मान में एक अंसारी वार्ड है । लेकिन हिंदुस्तान की गुलामी ने अंसारी के मन को विचलित कर दिया और अपनी एशो-आराम की जिंदगी छोड़कर वे वतन की राह में कुर्वान होने के लिए वापस चले आए।उन्होने कांग्रेस ज्वाइन किया और 1916 में हुए लखनऊ पैक्ट में अहम किरदार निभाया।वे कई दफा कांग्रेस महासचिव बने और और 1927 में तो वे कांग्रेस के अध्यक्ष बना दिए गए। जामिया मिल्लिया इस्लामिया की स्थापना में डॉ अंसारी का अहम योगदान था और जामिया के स्थापना में मुख्य योगदान देने बाले डॉ अजमल खान की मौत के बाद डॉ अंसारी जामिया के वाइस चांसलर भी बने।
दिल्ली में डॉ अंसारी का दरियागंज के इलाके में अपना भव्य मकान था और महात्मा गांधी अक्सर उनके मेहमान होते थे। जाहिर है उनकी हवेली उस समय राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र हुआ करती थी। आजादी के बाद सरकार ने उनके सम्मान में एक सड़क का नाम अंसारी रोड रखा है। डॉ अंसारी नई पीढ़ी के प्रगतिशील मुसलमानों में से थे जो इस्लाम की एक उदार तस्वीर दुनिया के सामने रख रहे थे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। वे बहुत ही कम उम्र में इस दुनिया से चले गए। सन् 1936 में मसूरी से दिल्ली आते समय हार्ट एटेक की वजह से ट्रेन में ही डॉ अंसारी की मौत हो गई। कितने संयोग की बात है कि डॉ अंसारी के ही उम्र के मुंशी प्रेमचंद भी थे( मुंशी जी का जन्म भी 1880 में ही हुआ था) और उनकी भी मौत भी 1936 में ही हुई। पुनर्जागरण का एक बड़ा सितारा समय से पहले बुझ गया-जिसकी शायद उस समय सबसे ज्यादा जरुरत थी।

डॉ अंसारी से कुछ और भी बातें जुड़ी है। वर्तमान उपराष्ट्रपति डॉ हामिद अंसारी भी उसी परिवार से ताल्लुक रखते हैं और बाहुवली सांसद मुख्तार अंसारी भी...जिसमें डॉ अंसारी पैदा हुए थे। दरअसल, गाजीपुर-आजमगढ़ में मुगलों के जमाने से ही(जानकारों का कहना है कि मुगलसराय का नाम मुगल सेना की छावनी बनने की वजह से ही रखा गया जो उस रास्ते अक्सर बंगाल जाया करती थी) या उससे पहले सल्तनत काल में ही मुसलमान सिपहसलारों की कुछ जागीरें थी। और उन्ही परिवारों में से कई प्रगतिशील मुस्लिम चेहरे बाद में उभरकर सामने आए..जिसमें डॉ अंसारी भी एक थे।
आज की पीढ़ी डॉ मुख्तार अंसारी को नहीं जानती। वो तो उस मुख्तार अंसारी को जानती है जो बाहुवली सांसद है और टेलिविजन पर्दे पर किसी रॉविनहुड सा चमकता है। अगर आप नामके पीछे डॉ भी लगाएंगे तो भी यह पीढ़ी नहीं समझ पाएगी क्योंकि पीएचडी करना अब बहुत 'आसान' हो गया है।

2 comments:

om kabir said...

apke article se kafi jankari meli.

bhupendra said...

आपने मुख्तार अंसारी जी के बारे में अच्छी जानकारी दी है। उम्मीद है आगे भी इसी तरह की जानकारी भरी रचनाएं पढ़ने को मिलेगी। लिखते रहिए।